Brendon McCullum

 


जब वह बल्लेबाजी करता था तब अपनी बेखौफ हिटिंग से बल्लेबाजी के सारे नियम कानून तोङ देता था और जिस दिन वह लय में होता था उस दिन वह अपने बल्ले के तूफान में विपक्षी टीम के गेंदबाजों को उङा देता था। उस वक्त भी अपनी बल्लेबाजी के अंदाज से वह टेस्ट क्रिकेट की प्रकृति को चैलेन्ज कर रहा था जब वह एक खिलाङी के तौर पर न्यूजीलैंड की टीम से अपना आखिरी मैच खेल रहा था और वह आज भी टेस्ट क्रिकेट की प्रकृति को अपनी कोचिंग से चैलेन्ज कर रहा है जब इंग्लैंड की टेस्ट टीम का कोच है।

एक ऐसा बेखौफ खिलाङी जिसे काॅपीबुक स्टाइल की कोई परवाह नही थी,जिसे डिफेंस की कोई खास परवाह नही थी यहां तक कि जिसे अपने विकेट की भी कोई खास परवाह नही थी वह आज इंग्लैंड की टेस्ट टीम का कोच है तो वह लोग जो यह सोच रहे हैं कि भारत के हाथों पांच टेस्ट मैचों की सिरीज में मिली हार से बहुत फर्क पङा होगा वह गलतफहमी में हैं। जितना निर्भीक मैकुलम थे अगर उतनी ही निर्भीकता के साथ इंग्लैंड की टीम ने भारत के खिलाफ टेस्ट सिरीज में बल्लेबाजी की होती तो परिणाम कुछ अलग ही होते।

मैकुलम कितना निर्भीक होकर खेलते थे इसका अंदाजा उनके टेस्ट कैरियर के आखिरी मैच में खेली गयी विस्फोटक पारी से लगाया जा सकता है। आस्ट्रेलिया के खिलाफ साल 2016 में दो टेस्ट मैचों की सिरीज के दूसरे मैच की पहली पारी में ब्रेंडन मैकुलम ने अपने बल्ले से टेस्ट क्रिकेट की सबसे तेज शतकीय पारी खेल दी थी। मैकुलम ने महज 54 गेंद में शतक ठोंक दिया था और इस पारी में कुल 79 गेंद खेलकर 145 रन ठोंक दिए थे जिसमें 21 चौके और 6 छक्के शामिल थे।

बैजबाल क्रिकेट के जनक कहे जाने वाले ब्रेंडन मैकुलम ने अपने आखिरी टेस्ट में टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज शतक लगाकर टेस्ट क्रिकेट से विदा तो ले लिया लेकिन शायद मन ही मन उस पारी के बाद ही यह तय कर लिए थे कि वह अब टेस्ट क्रिकेट को उनके ही अंदाज में सबको खेलते देखना चाहते हैं और शायद यही वजह है कि मैकुलम ने इंग्लैंड को अपनी कोचिंग में बैजबाल क्रिकेट खेलने को लेकर प्रोत्साहित किया है।


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